what is the cyber security in hindi
Please click this video☝️☝️
indian technology
cyber-security-hindi
What is cyber security in Hindi
आप आए दिन समाचारों और अखबारों में साइबर अपराध के बारे में सुनते और देखते रहते है. साइबर अपराध का शिकार कोई भी हो सकता है. क्योंकि साइबर अपराधी रोज नए तरीकों से साइबर अपराध को अंजाम देनी की कोशिश करते है. इसलिए साइबर अपराध और इनके कारनामों से बचने के लिये आपको साइबर सुरक्षा के बारे में जानना बहुत ही आवश्यक है, इस आर्टिकल में हम आपको बताने वाले साइबर सुरक्षा क्या है और ये कितने प्रकार की हो सकती है. साथ ही हम इससे जुडी करियर की सम्भावनाओ को भी इस आर्टिकल “साइबर सुरक्षा क्या है? (What is cyber security in Hindi)” में बताने वाले है.
साइबर सुरक्षा क्या है? (What is cyber security in Hindi)
साइबर सुरक्षा कंप्यूटर, नेटवर्क और सॉफ्टवेयर को साइबर आक्रमण से दूर रखने का तरीका है. जिसमे कंप्यूटर और नेटवर्क में उपलब्ध किसी भी प्रकार की सूचनाओं और डाटा को सुरक्षित और गोपनीय रखने का अभ्यास किया जाता है.
साइबर सुरक्षा एक जटिल प्रक्रिया है. और इसमें कही प्रकार के जोखिम प्रबंधन, टूल, प्रशिक्षण, अभ्यास और तकनीक लगती है. इन सारी वस्तु का एक साथ रख कर ही साइबर सुरक्षा का पुख्ता इंतज़ाम किया जाता है. प्रशिक्षित विशेषज्ञों द्वारा लगातार अभ्यास और नवीन तकनीक पर अनुसंधान से साइबर सुरक्षा के लक्ष्य को प्राप्त किया जाता है.
साइबर सुरक्षा की जरूरत क्यों है? (Why is cyber security important?)
आज के दौर में सभी काम कंप्यूटर और मोबाइल के मदद से होते है. छोटे से व्यवसायी से लेकर बड़े व्यवसायी और एक व्यक्ति से लेकर एक देश के सरकार तक हर कोई अपनी सुचनाए और डाटा कंप्यूटर और मोबाइल पर इलेक्ट्रॉनिक सूचनाओं के रुप में रखता है. और जब भी आप अपने कंप्यूटर और मोबाइल को इंटरनेट से जोड़ते हो तो ये डाटा भी इंटरनेट का भाग खुद ही बन जाते है.
इंटरनेट पर उपस्थित कोई भी विकृत बुद्दी व्यक्ति उन संवेदनशील जानकारियों और डाटा तक पहुँचाने का प्रयास कर सकता है. ये डाटा और सुचनाए आपके लिये कितनी कीमती है. ये सिर्फ आप जानते हो. आपके निजी तस्वीरे और वीडियो भी इस डाटा में हो सकती है जिसका गलत इस्तेमाल होने की पूरी संभावनाएँ होती है. इस सब से बचने के लिये आपको अपने डाटा और इलेक्ट्रॉनिक सूचनाओं के प्रति जागरूक रहना जरूरी है. जिसमे साइबर सुरक्षा आपकी मदद करता है.
किसी भी देश के लिए उसकी अंतराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा सबसे पहली प्राथमिकता होती है. इस प्रकार की संवेदनशील जानकारियों और डाटा भी कंप्यूटर पर उपलब्ध होती है. अगर ये जानकारिय और डाटा दुश्मन देश के हाथ लग जाए तो इसके खामियाजे की कल्पना करना भी मुश्किल होता है. इस लिये हमे साइबर सुरक्षा की जरूरत होती है.
बड़ी से लेकर छोटी बैंक तक अपने ग्राहकों के खातों से जुड़ी जानकारिय जैसे खाता नंबर, क्रेडिट कार्ड और पासवर्ड तक अपने बैंक के सर्वर में रखते है. अगर इस सर्वर और इसमें उपस्थित जानकारियों को पूरी तरह से सुरक्षित नही किया जाए तो ये ग्राहकों के लिये आर्थिक रुक से बहुत खतरनाक है. जिसे साइबर सुरक्षा के माध्यम से सुरक्षित किया जाता है.
सोशल मीडिया पर लोग पूरे दिन लगे रहते है. अपने और अपने परिवार से जुड़े हर एक वस्तु सोशल मीडिया में साझा करते रहते है. अगर इन खातों पर कोई नियंत्रण ले कर. आप से जुड़ी जानकारियों सार्वजनिक कर दे. तो कोई भी व्यक्ति सोशल मीडिया में विश्वास नही करेगा. इसलिए सोशल मीडिया के क्षेत्र अपना विश्वास बना चुके प्रतिष्ठित संस्थानों को अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिये साइबर सुरक्षा की जरूरत होती है.
साइबर सुरक्षा कितने प्रकार की होती है? (Types of cyber security)
साइबर सुरक्षा एक जटिल प्रक्रिया होती है. तथा ये किसी एक अभ्यास या तरीके से प्राप्त नही की जाती है. साइबर सुरक्षा को कही स्तर तक प्राप्त करना होता है. जैसे आप अपने कंप्यूटर में इंटरनेट के माध्यम से कोई भी वेबसाइट चलाते हो. तो साइबर सुरक्षा इंटरनेट से लेकर आपके कंप्यूटर तक हर एक स्तर पर होनी चाहिए. साइबर सुरक्षा तभी पुख्ता होगी जब आपके कंप्यूटर, उस वेबसाइट, वेबसाइट के सर्वर, ब्राउज़र, इंटरनेट तक सुरक्षित हो.
नेटवर्क सुरक्षा (Network security)
इस प्रकार की साइबर सुरक्षा तब की जाती है जब आप अपने कंप्यूटर और मोबाइल को नेटवर्क या इंटरनेट से जोड़ते हो. नेटवर्क सुरक्षा के लिये कही सारे उपकरण, प्रक्रिया और अभ्यास का सहारा लिया जाता है. नेटवर्क को सुरक्षित काम करते रहने के लिये कही सारे नियम और कानून बनाए जाते है. जिससे अपराध तत्व नेटवर्क को नही छेड़ पते है.
नेटवर्क से जुड़े नियम और कायदे दो वस्तुओ को ध्यान में रख कर बनाए जाते है. पहला साइबर अपराधी को नेटवर्क से किस प्रकार से दूर रखा जाए और दूसरा नेटवर्क में उपस्थित डाटा की गोपनीयता को कैसे बनाई रखी जाए.
ये नियम इसप्रकार से हो सकते है जैसे कोई भी व्यक्ति यूज़र नाम और पासवर्ड के बिना नेटवर्क में प्रवेश नही मिल सकता है. और हर एक व्यक्ति का किसी नेटवर्क में उपस्थित फाइल को देखने और उपयोग करने का समय भी निश्चित हो सकता है.
डाटा लूप प्रिवेंशन (Data lose prevention (DLP))
किसी भी संस्थान और सरकार के लिये उनके डाटा और डाटा में उपस्थित सुचनाए बहुमूल्य होती है. जिसकी सुरक्षा और गोपनीयता उनकी प्राथमिक ज़िम्मेदारी होती है. इन डाटा को डाटा लूज़ प्रिवेंशन (DLP) के इस्तेमाल से सुरक्षित और गोपनीय रखा जाता है.
इस प्रकार के साइबर सुरक्षा में संस्थाने और सरकारे कही ऐसे नियम और नीतियाँ बनाती है. जिससे डाटा के गलत उपयोग को कही हद तक रोका जा सकता है. इन नियमों को लागू करने के लिये कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और टूल की मदद ली जाती है. अगर किसी भी उपयोगकर्ता के द्वारा इन नीतियों का उल्लगन किया जाता है. तो डाटा प्रबंधक को तुरंत ही चेतावनी मिल जाती है. जिससे प्रबंधक उपयुक्त समय पर कार्यवाही कर सके.
इसके साथ ही डाटा प्रबंधक अपने संस्थान के अन्दर या बहार डाटा के गतिविधियों पर भी नजर रख सकता है.
क्लाउड सुरक्षा (Cloud security)
क्लाउड सुरक्षा में क्लाउड नेटवर्क से जुड़े उपकरणों और डाटा को सुरक्षित किया जाता है. ये एक प्रकार से नीतियों, प्रक्रिया, नियंत्रण और अभ्यास का समूह है, जिसे क्लाउड नेटवर्क में उपस्थित प्रत्येक उपकरण और उपयोगकर्ता पर लागु होता है और उनको मानना होता है. जिससे हर कोई सुरक्षित रह सके और अपराधियों को समय पर पकड़ने में मदद मिल सके.
चूँकि ये सारी नीतियाँ किसी एक केंद्र से बनाई और लागू की जाती है. जिससे परिणाम स्वरुप अगर कभी भी क्लाउड नेटवर्क में नीतियों के पालन होने में लापरवाही हो. तो उसका तुरंत ही उपचार कर के अपराधियों से बचा जाना संभव हो पाता है.
कोनसा क्लाउड नेटवर्क कितना सुरक्षित है. ये पूरी तरह से क्लाउड कंपनी के नीतियाँ बनाने और उसे प्रभावी लागू करने के तरीके पर निर्भर करता है.
ईन्त्रुसिओन डिटेक्शन सिस्टम (Intrusion Detection Systems (IDS)
ये एक प्रकार की सुरक्षा प्रणाली है. इस प्रणाली के पास साइबर अपराध से जुड़े अपराधों और उसके कारणों का डाटा उपलब्ध होता है. नेटवर्क में होने वाली हर एक गतिविधियों पर ईन्त्रुसिओन डिटेक्शन सिस्टम (IDS) की नजर होती है. अगर नेटवर्क में कुछ भी असामान्य होता है. तो ये प्रणाली उस गति विधि को अपने डाटा भंडार में जा कर जांचती है.
जिससे पता चल सके कि ये गतिविधि कितनी गंभीर है और इसकी जानकारी डाटा प्रबंधक को देनी चाहिए या नही. उसी अनुसार जानकारी नेटवर्क प्रबंधक को दी जाती है. और नेटवर्क प्रबंधक अपने सुझबुज और अनुभव से निर्णय लेता है. कि उसको आगे क्या कार्य करना है.
ईन्त्रुसिओन प्रिवेंशन सिस्टम (Intrusion prevention Systems (IPS)
ये प्रणाली भी ईन्त्रुसिओन डिटेक्शन सिस्टम (Intrusion Detection Systems) की तरह ही काम करती है. लेकिन ये प्रणाली एक कदम आगे रहती है. अगर नेटवर्क में कुछ भी असामान्य गतिविधि हो रही है. और डाटा को परखने से उस गतिविधि की गंभीरता सिद्ध होती है. तो ये प्रणाली इतनी सक्षम होती है. कि अपने आप के सुझबुज और अनुभव से उपयुक्त निर्णय ले सकती है. जिससे डाटा प्रबंधक की निर्भरता कम हो जाती है. और समय पर अपराधी को रोका जा सकता है.
एंटीवायरस (Antivirus)
Comments
Post a Comment